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माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़ शुरू किया स्टार्टअप, 3500 करोड़ है कंपनी की वैल्यूएशन – Lenskart Startup Story in Hindi

Lenskart Startup Story in Hindi
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Lenskart Startup Story in Hindi: माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी इंटरनेशनल कंपनी में काम करने वाले एक युवा ने अपनी नौकरी छोड़कर भारत लौट आया और ऑनलाइन चश्मा बेचने के आईडिया पर काम करने का मन बनाया। इस युवा को अपने आईडिया पर पूर्ण विश्वास था इसीलिए कई सालों की मेहनत के बाद आज Lenskart एक ब्रांड बन चुकी है जिसकी वैल्यूएशन 3,500 करोड़ के ऊपर है।

देश की एक तिहाई जनता को चश्मों की जरूरत है क्योंकि अकेले भारत में ही 15 लाख से ज्यादा अंधे लोग रहते है। पूरी दुनिया के 50% अंधे लोग अकेले हमारे देश में ही रहते है जो हमको विश्व का ब्लाइंड कैपिटल बना रहा है। चश्मे कुछ लोगों की पहुँच से बाहर होते है या फिर उनके बजट के बाहर होते है।

Lenskart के फाउंडर ने इस समस्या को काफी रिसर्च के बाद ढूँढ निकाला और देश के लोगों को घर बैठे चश्मा मुहैया कराने का मन बनाया। लोगों को उनकी जरूरत के अनुसार लेंसकार्ट ने कम पैसों में ऑनलाइन चश्मा बेचना शुरू किया और अपने इस यूनिक कांसेप्ट के दम पर लोगों में काफी जल्दी पॉपुलर हो गए।

Lenskart क्या है?

Lenskart आँखों के चश्में व लेंस बेचने वाली एक ऑनलाइन E-Commerce कंपनी है। लेंसकार्ट एक प्रकार का ऑनलाइन ऑप्टिकल स्टोर है जहाँ आपको नए जमाने के डिज़ाइनर आँखों के चश्मे कम दामों पर देखने को मिलते है।

लेंसकार्ट ऑनलाइन प्लेटफार्म के साथ साथ ऑफलाइन मार्केट में भी मौजूद है। लेंसकार्ट अपने ग्राहकों को “Home eye checkup” की सुविधा प्रदान करता है जिसकी मदद से आप घर बैठे अपनी आँखों की जाँच करवा सकते है।

लेंसकार्ट के पास 5 हजार से अधिक प्रकार के चश्मे उपलब्ध है जो आपको फ्री डिलीवरी व 14 दिन की रिप्लेसमेंट गॉरन्टी के साथ मिल सकते है। ये भारत के साथ साथ अमेरिका, दुबई और सिंघापुर में भी अपने चश्मे बेच रहे है।

Lenskart के फाउंडर कौन है?

पियूष बंसल (Peyush Bansal) लेंसकार्ट के फाउंडर और CEO है। वैल्यू टेक्नोलॉजीज (Valyoo Technologies) लेंसकार्ट की मूल कंपनी है जिसको पियूष बंसल ने अपने कॉलेज के समय में बनाया था।

पियूष बंसल के अलावा इनकी पत्नी नेहा बंसल, सुमित कपाही और अमित चौधरी भी लेंसकार्ट के कोफाउंडर की लिस्ट में शामिल है।

पियूष बंसल IIT से इंजीनियरिंग करना चाहते थे लेकिन इनका सिलेक्शन IIT में नहीं हो पाया जिसके बाद पियूष ने McGill University कनाडा से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की ब्रांच से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया और उसके बाद माइक्रोसॉफ्ट में प्रोग्राम मैनेजर के पद पर नौकरी करने लगे।

Lenskart की शुरुआत कैसे हुई?

पियूष बंसल जब माइक्रोसॉफ्ट में काम कर रहे थे तो उनको एक बार बिल गेट्स से मिलने का मौका मिला। दरअसल बिल गेट्स अपने इंटर्न्स को अपने घर पर बुलाया करते थे। उस मीटिंग से पियूष को अहसास हुआ कि बिल गेट्स ने माइक्रोसॉफ्ट को बनाकर बहुत बड़ा काम किया है। लेकिन उन्हें इस एक बात ख़राब लग रही थी कि वो इस कंपनी में काम करके उनकी जिंदगी बेहतर बना रहे थे जो पहले से ही सक्षम है।

पियूष बंसल उन 50 हजार कर्मचारियों के साथ काम करके खुद की पहचान नहीं खोना चाहते थे। पियूष लोगों की जिंदगी में परिवर्तन लाना चाहते थे इसीलिए इन्होंने नौकरी छोड़ दी और भारत वापस आ गए। भारत आकर पियूष IIM Banglore से मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट करने लगे।

IIM के समय में ही पियूष ने वैल्यू टेक्नोलॉजीज (Valyoo Technologies) की स्थापना की थी। पियूष ने SearchMyCampus नामक एक पोर्टल लॉच किया जिसके माध्यम से स्टूडेंट्स किताबें, इंटर्नशिप, किराये पर घर, कार पूलिंग आदि सुविधाएँ प्राप्त कर सकते थे। पियूष का यह पहला बिज़नेस था जो स्टूडेंट्स की सारी समस्यायों को दूर करता था।

SearchMyCampus पियूष बंसल का सफल परीक्षण था। इसके बाद अब पियूष ऑनलाइन E Commerce में अपना कदम रखना चाहते थे। रिसर्च करने के बाद पियूष ने आईवियर इंडस्ट्री में बिज़नेस बनाने का फैसला लिया। पियूष ने अमेरिका के मार्केट के लिए Flyrr.com नामक एक प्लेटफार्म लॉच किया।

अमेरिका के मार्केट में तो यह बिज़नेस ग्रो कर रहा था लेकिन पियूष अब इस बिज़नेस को भारत की मार्केट में लॉंच करना चाहते थे। इसीलिए नवंबर 2020 में पियूष बंसल ने लेंसकार्ट की शुरुआत की। ये शुरू में केवल कांटेक्ट लेंस ही बेचा करते थे लेकिन कुछ महीनों बाद इन्होने सनग्लास और आईग्लास के साथ साथ कई फैशन आईवियर भी लॉंच कर दिए।

Lenskart को शुरू करने में क्या समस्या आई?

पियूष जब माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़कर भारत लौटे तो इनके परिवार वाले चकित रह गए। इनके पिता ने पियूष को इसीलिए इतना पढ़ाया था ताकि ये बड़ी कंपनी में नौकरी करें और अपना जीवन बेहतर बनायें। पियूष के पिता इनके फैसले से बिलकुल भी सहमत नहीं थे।

घरवालों की तरफ से पियूष को सहयोग नहीं मिला लेकिन फिर भी पियूष अपने फैसले पर अडिग रहे और अपना काम करते गए। जब तक पियूष सफल नहीं हो गए तब तक इनके घरवालों, रिश्तेदारों व दोस्तों ने इनका सहयोग नहीं किया लेकिन बाद में लोगों ने पियूष के सपने और पैशन को समझा और उनका सपोर्ट किया।

पियूष का बिज़नेस बैकग्राउंड नहीं था जिसके कारण पियूष ने बिज़नेस शुरू करने में हड़बड़ी नहीं दिखाई। अपने आईडिया पर काम करने से पहले उसकी कायदे से रिसर्च की फिर जाकर उस पर काम किया जिससे इनको सफलता मिलती चली गई।

पियूष बंसल और शार्क टैंक इंडिया की कहानी

पियूष बंसल बिज़नेस रियलिटी शो शार्क टैंक इंडिया (Shark Tank India) सीजन-1 के जज (Shark) भी रह चुके है। Venture Catalyst ने शार्क टैंक इंडिया को 300 फाउंडर्स की लिस्ट दी थी जिसमें उन लोगों के नाम थे जिन्होनें भारत में हजारों करोड़ों के बिज़नेस खड़े किये हैं।

300 फाउंडर्स की लिस्ट में पियूष बंसल का भी नाम था। पियूष के यूनिक बिज़नेस आईडिया की वजह से शार्क टैंक इंडिया ने इनको सीजन-1 में जज के तौर पर इनवाइट किया था।

इस शो की वजह से ही पियूष के देश प्रेम के बारे में लोगों को पता चला। जहाँ बाकि जज स्टार्टअप में फायदे की दृष्टि से इन्वेस्ट कर रहे थे वहीं पियूष स्टार्टअप के विज़न हिसाब से उसमें इन्वेस्ट कर रहे थे। पियूष ने जुगाड़ू कमलेश नामक एक किसान को 50 लाख दिए ताकि कमलेश किसानों की समस्याओं को अपने आइडिया से दूर कर पाए।

जुगाड़ू कमलेश के आइडिया पर इन्वेस्ट करने के लिए पियूष को लोगों तथा जजेस ने भी खूब सराहा क्यूँकि बाकि जजेस को कमलेश का आइडिया प्रॉफिटेबल नहीं लग रहा था जिसकी वजह से किसी ने भी कमलेश के आइडिया पर इन्वेस्ट नहीं किया था।

Lenskart का लक्ष्य क्या है?

Lenskart लोगों को कम दामों पर अच्छी क्वालिटी के चश्मे उपलब्ध करवाना चाहती है।Lenskart छोटे-छोटे शहरों व क़स्बों में अपने स्टोर्स खोलने पर काम कर रही है। Lenskart देश में अगले 2 सालों में 500 स्टोर्स तथा 5 सालों में 2000 स्टोर्स खोलने की तैयारी कर रही है।

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