बुजुर्गों की समस्यायों व उनके अकेलेपन को दूर करने वाला “Goodfellows” नामक स्टार्टप में स्वयं रतन टाटा (Ratan Tata) ने इन्वेस्ट करने का ऐलान किया है।
भारत में 1.5 करोड़ के आसपास ऐसे बुजुर्ग है जो किसी ने किसी तरीक़े से अकेलेपन में अपना जीवन बिता रहे है। पहले यह समस्या केवल बाहरी देशों में थी लेकिन अब भारत में भी यह समस्या बढ़ती जा रही है और इस समस्या को ही दूर करने के लिए इस स्टार्टअप ने यह ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली है।
आख़िर क्यूँ रतन टाटा ने किया Goodfellows स्टार्टअप में इन्वेस्ट?
रतन टाटा की उम्र इस समय 84 वर्ष है इसीलिए वो बुजुर्गों की समस्या व अकेलेपन को समझते है। रतन टाटा ने एक बार कहा था कि जब तक आप वास्तव में बूढ़े नहीं हो जाते, तब तक किसी को भी बूढ़े होने का मन नहीं करता।
टाटा द्वारा कही इस बात से बुजुर्गों के प्रति उनकी चिंता को समझा जा सकता है। रतन टाटा ने इस स्टार्टअप के फ़ाउंडर की भी काफ़ी तारीफ़ की थी और कहा था कि एक प्रयास है युवाओं को बुजुर्गों से जोड़ने का।
16 अगस्त 2022 को इस स्टार्टअप के नए व अनोखे कॉन्सेप्ट की वजह से ही रतन टाटा ने इसमें इन्वेस्ट करने का ऐलान किया है।
शान्तनु नायडू कौन है?
शान्तनु नायडू Goodfellows स्टार्टप कम्पनी के फ़ाउंडर है। शान्तनु इस समय टाटा की कम्पनी में जनरल मैनेजर है और 2018 से रतन टाटा की मदद कर रहे है।
शान्तनु का जन्म 1993 में पुणे में हुआ था और इनसे पहले इनके परिवार की पाँच पीढ़ी टाटा के साथ काम कर चुकी है। शान्तनु सितम्बर 2014 से ही टाटा के साथ काम कर रहे है । इन्होंने Goodfellows कम्पनी के साथ साथ चार और कम्पनी खोली है जो लोगों व जानवरो की भलाई पर आधारित है।
GoodFellows क्या है?
GoodFellows भारत का पहला व अनोखा स्टार्टअप है जो बुजुर्गों के अकेलेपन को कम करने में उनकी मदद करता है। जो बुजुर्ग घर में अकेले रहते है उनको यह स्टार्टप एक साथी प्रदान करता है ।
बुजुर्ग इस साथी के साथ बात कर सकते है, खेल सकते है, न्यूज़ पेपर पढ़वा सकते है, बाहर साथ में घूमने जा सकते है, सब्ज़ी वग़ैरह लेने जा सकते है।
Goodfellows का बिसनेस मॉडल क्या है?
Goodfellows अभी फ्रीमियम सब्स्क्रिप्शन मॉडल पर काम कर रहा है । यह स्टार्टअप पहले महीने अपने कस्टमर्स को फ्री में सर्विस प्रदान करता है और अगर कस्टमर्स को इनकी सर्विस अच्छी लगती है तो वो आगे उसके लिए कुछ सब्स्क्रिप्शन फीस देकर इस सर्विस को आगे बढ़ा सकते है।
अभी तक जिन जिन लोगों ने इनके फ्री सर्विस को लिया है वो सभी इनके पेड सर्विस का भी हिस्सा बन चुके है । इनका कन्वर्ज़न रेट अभी तक 100% है।
Goodfellows अपने ट्रीयल फ़ेस में भी सफल रहा!
Goodfellows अपने बीटा फ़ेस में था और पिछले 6 महीने से मुंबई में 20 बुजुर्गों को अपनी सर्विस प्रदान कर रहे थे। इनके बीटा फ़ेस के सफल होने के बाद अब ये अपनी सर्विस पुणे, चेन्नई, बेंगलुरु में भी देने जा रहे है।
Goodfellows कैसे अपने कर्मचारियों का सिलेक्शन कैसे करता है?
इनके स्टार्टअप में सिलेक्शन की प्रक्रिया बिल्कुल अलग है। ये ग्रैजूएट युवाओं को अपने साथ जोड़ते है और कई तरिको से परखने के बाद उनका सिलेक्शन करते है। इनके सिलेक्शन प्रक्रिया का अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते है कि इन्होंने 600 ऐप्लिकेशन फार्म में से मात्र 6 लोगों को सलेक्ट किया था।
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