एक उद्यमी का जन्म
साराम की नींव रखी गई थी डिग्विजय सिंह के द्वारा। COVID-19 पैंडेमिक के दौरान, जब वे महज 16 साल के थे, उन्होंने नए वेंचर्स की खोज शुरू की। चॉकलेट के प्रति उनका पैशन उन्हें इसकी मेकिंग सीखने की ओर ले गया।
सपोर्ट और स्किल्स का संगम
उनके कजिन महावीर सिंह के सपोर्ट से, डिग्विजय ने बिना किसी कंक्रीट प्लान के इस जर्नी को शुरू किया। YouTube ट्यूटोरियल्स और अनेक ट्रायल्स के जरिए उन्होंने अपनी स्किल्स को परफेक्ट किया
और अपने होममेड चॉकलेट्स को फैमिली और फ्रेंड्स के साथ शेयर करना शुरू किया। इनिशियली सेल्फ-फंडेड, उनका वेंचर एक हॉबी के रूप में शुरू हुआ, लेकिन पॉजिटिव फीडबैक ने उन्हें एक बिजनेस प्लान डेवलप करने के लिए प्रेरित किया।

इनोवेशन की दिशा में एक कदम
एक पिछले इंसिडेंट से प्रेरित होकर, जहां चॉकलेट्स को गिफ्ट्स के रूप में दिया गया था, डिग्विजय ने होटल मालिकों और कार शोरूम्स से अपनी क्रिएशंस को सेल करने का निर्णय लिया।
एक अनोखी पहल
2021 में, डिग्विजय ने एक आई-ओपनिंग आर्टिकल पढ़ा जिसमें कम ज्ञात इंडिजेनस फ्रूट्स के एक्सटिंक्शन की बात कही गई थी। मार्केट में एक गैप नोटिस करते हुए, जहां केवल मेनस्ट्रीम फ्रूट्स ही कॉमनली यूज़ किए जाते थे, उन्होंने इन यूनिक फ्लेवर्स को इंट्रोड्यूस करने का रिस्क लिया। यही वह साल था जब उन्होंने अपने आर्टिसनल चॉकलेट ब्रांड साराम को लॉन्च किया।
पहला बड़ा ऑर्डर
2021 में ही, डिग्विजय को एक कार शोरूम मालिक से उनके पहले 1000 ऑर्डर्स मिले।
सफलता की ऊंचाइयां
अब 19 साल के डिग्विजय, एक सेल्फ-टॉट चॉकलेटियर के रूप में, चॉकलेट बिजनेस में अपार सफलता हासिल कर चुके हैं, जिसमें उन्होंने दो टन से ज्यादा चॉकलेट्स नेशनवाइड कस्टमर्स को बेची हैं। साराम की पॉपुलै







