आत्मनिर्भर भारत के तहत देश में स्टार्टअप और बिजनेस की हवा चल रही है। युवा नौकरी से ज्यादा स्टार्टअप और बिजनेस को महत्व दे रहे है। स्टार्टअप का एक कंपनी में परिवर्तित करने के लिए निवेश की आवश्यकता होती है। कुछ सालों में विदेशी निवेशकों का काफी योगदान रहा है पर 2022 में इसमें कमी आई थी।
YourStory में छपी खबर के अनुसार उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के सचिव ने स्टार्टअप और निवेश को लेकर कुछ बातें सामने रखी है, जो स्टार्टअप और बिजनेस में इंटरेस्ट रखने वाले लोगों को पता होना चाहिए।
पिछले 2 सालों में कितना विदेशी निवेश आया?
सरकारी आँकड़ों ने विदेशी निवेश से जुड़े कुछ डेटा सामने रखा है, इसके अनुसार –
- साल 2021 में 51.3 अरब डॉलर का विदेशी निवेश प्राप्त हुआ।
- साल 2022 की जनवरी-सितंबर छमाही में 42.5 अरब डॉलर का विदेशी निवेश प्राप्त हुआ।
- वित्त वर्ष 2021-22 कुल मिलाकर 84.84 अरब डॉलर फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) प्राप्त किया है।
क्या कहा DPIIT सचिव अनुराग जैन ने?
अनुराग जैन ने कहा कि स्टार्टअप और Entrepreneurship के इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम की अवधारणा 16 जनवरी, 2016 को स्टार्टअप इंडिया योजना के तहत भारत सरकार ने रखा था।
इस योजना के माध्यम से देश में स्टार्टअप इकोसिस्टम में इनोवेशन और निजी निवेश को बढ़ावा दिया गया। देश के निवेशकों ने यहाँ के छोटे-छोटे स्टार्टअप्स को निवेश दिया और आज वो स्टार्टअप बड़ी कंपनियों का रूप ले चुके है।
विदेशी निवेश की वजह से Edtech, Fintech और मेडिकल जैसे स्टार्टअप को तगड़ी विदेशी फंडिंग प्राप्त हुई जिससे उस समय के स्टार्टअप या तो बड़ी कंपनी या फिर यूनिकॉर्न कंपनी का दर्जा हासिल कर चुके है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है और लगातार मजबूत बनता जा रहा है। इस स्टार्टअप इकोसिस्टम का भारत को फायदा मिलेगा और अगले साल तगड़ा विदेशी निवेश प्राप्त होगा।






