वेदांता ग्रुप ने अपने कारोबारी ढांचे को सरल बनाने और वित्तीय चुनौतियों का सामना करने के लिए नई रणनीतियां अपनाई हैं। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ग्रुप ने जे पी मॉर्गन के साथ सहयोग किया है। यह जानकारी अंदरूनी सूत्रों से मिली है। जे पी मॉर्गन की विशेषज्ञता का इस्तेमाल करते हुए ग्रुप अपने एनर्जी से मेटल सेक्टर तक फैले व्यापारिक संगठन को और अधिक स्ट्रीमलाइन करने की कोशिश कर रहा है।
वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि वेदांता ग्रुप के पास इस वित्त वर्ष की देनदारियों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन अगर आगे के लिए कोई मजबूत कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वित्त वर्ष में कंपनी को बड़ी मुश्किलें हो सकती हैं। इसी के चलते ग्रुप ने कई बड़ी योजनाएं भी प्रस्तुत की हैं।
फंड जुटाने की दिशा में वेदांता ग्रुप ने कई पहल की हैं। हाल ही में, ग्रुप ने 1.25 अरब डॉलर के प्राइवेट लोन के लिए बातचीत आगे बढ़ाई है और इसके साथ ही 3 अरब डॉलर के US currency bonds की रीफाइनेंसिंग के लिए भी सोर्सेज की तलाश में है। इन बॉन्ड्स का भुगतान अगले दो सालों में करना है।

इसके अलावा, वेदांता लिमिटेड ने अपने बिजनेस को फिर से पटरी पर लाने के लिए डीमर्जर की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। कंपनी ने बेस मेटल यूनिट को वेदांता बेस मेटल्स लिमिटेड के रूप में अलग किया है और इसकी घोषणा 29 सितंबर को की गई थी। योजना के अनुसार, ग्रुप अपने व्यापार को 6 अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में विभाजित करेगा।
कोटक की एक रिपोर्ट के अनुसार, वेदांता रिसोर्सेज पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है और वित्त वर्ष 2025 में 3 अरब डॉलर का फंडिंग गैप एक बड़ी चिंता का विषय है। इसके चलते, कंपनी को फंड जुटाने के लिए अन्य विकल्पों जैसे कि स्टेक सेल या एसेट सेल की ओर देखना पड़ सकता है।
वेदांता ग्रुप की ये कोशिशें दर्शाती हैं कि कंपनी अपने वित्तीय संरचना को मजबूती देने और बाजार में अपनी स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।





