देश को नमक से लेकर महँगी कार बनाकर देने वाले रतन टाटा की बदले की कहानी बड़ी दिलचस्प है।

90 के दशक में टाटा की पैसेंजर कार यूनिट काफी घाटे में चल रही थी इसीलिए टाटा ने उसे बेचने का फैसला कर लिया था। 

रतन टाटा इसके लिए फोर्ड मोटर्स के पास गए लेकिन फोर्ड मोटर्स के चेयरमैन बिल फोर्ड ने टाटा का मजाक उड़ाया। 

बिल फोर्ड ने कहा कि यदि आपको कार बनाना नहीं आता है तो आपने इसे शुरू ही क्यों किया। 

बिल फोर्ड ने मजाक उड़ाते हुए कहा कि आपकी इस यूनिट को खरीदकर हम आपपर बहुत बड़ा अहसान कर रहे है।

इस घटना के बाद रतन टाटा ने पैसेंजर कार यूनिट को बेचने का फैसला रद्द कर दिया और टाटा मोटर्स को सुधारने में लग गए। 

मात्र 10 साल के भीतर ही टाटा मोटर्स ने पैसेंजर कार के सेक्टर में टॉप पर पहुँच गई थी। 

टाटा मोटर्स एक नए मुकाम पर थी परन्तु फोर्ड मोटर्स अब दिवालिया होने की कगार पर पहुँच चुकी थी। 

तभी रतन टाटा, बिल फोर्ड के पास Jaguar और Land Rover ब्रांड को खरीदने के लिए पहुँच गए। 

जब रतन टाटा ने इस डील की पेशकश की तो बिल फोर्ड गिड़गिड़ाते हुए बोले की आप हमारे ब्रांड को खरीदकर हमपर बहुत बड़ा अहसान कर रहे है।

रतन टाटा ने बोलकर नहीं बल्कि खुद को साबित करके बिल फोर्ड से बदला लिया।