भारत देश का एक गाँव बिजली पहुँचने से पहले ही डिजिटल हो गया है।

यह कहानी महाराष्ट्र में ठाणे जिले के उत्तर में पश्तेपाड़ा नामक एक आदिवासी गाँव की है।

इस आदिवासी गाँव में आजतक बिजली नहीं पहुँच पाई है लेकिन...

फिर भी इस गाँव के बच्चे टैबलेट के माध्यम से डिजिटल पढ़ाई करते है।

बच्चों के पास उपयुक्त कंटेंट लैस टैबलेट के साथ-साथ डिजिटल पेन भी मौजूद है।

इसका पूरा श्रेय गुंड नामक एक सरकारी टीचर को जाता है।

गुंड ने मराठी माध्यम से पोस्ट ग्रेजुएशन और बीएड की पढ़ाई की थी।

साल 2009 में पश्तेपाड़ा के जिला परिषद स्कूल में इनकी नियुक्ति हुई।

गुंड ने फोल्डेबल सोलर पैनल से टेक्नोलॉजी आधारित टीचिंग की शुरुआत की।

उसके बाद उन्होंने क्राउडफंडिंग और NGO के जरिये पैसे इकट्ठे किए।

गुंड को देखते हुए 40 और स्कूलों में इसी तकनीकी को लागू किया गया।

गुंड के प्रशिक्षण से महाराष्ट्र में अब तक 11,200 डिजिटल स्कूल स्थापित किए जा चुके है।