Meesho Startup Story In Hindi

भारत के नंबर 1 रिसेल्लिंग ऐप मीशो की कहानी – Meesho Startup Story In Hindi

Meesho Startup Story In Hindi: भारत में काफी समय से Amazon, Flipkart, Myntra आदि जैसे इंटरनेशनल इ कॉमर्स (E Commerce) प्लैटफॉर्म्स का दबदबा रहा है लेकिन 5 साल पहले शुरू हुए एक ऑनलाइन रिसेल्लिंग प्लैटफॉर्म Meesho इन सभी बड़ी कंपनियों को कड़ी टक्कर दे रहा है।

Amazon और Flipkart के प्रोडक्ट बिकवाने पर ये प्लेटफॉर्म्स अपने सेलर्स को कुछ प्रतिशत कमीशन प्रदान करते है। इन प्लेटफॉर्म्स पर कमीशन काफी कम मिलता है तथा हर कोई इनका सेलर नहीं बन सकता है जिसकी वजह से इनकी ज्यादातर सेल इनकी वेबसाइट व ads के माध्यम से ही आती है।

Meesho ने पहले भारतीय लोगों तथा मार्केट को अच्छे से समझा और उसके हिसाब से अपना ऑनलाइन रिसेल्लिंग प्लैटफॉर्म लॉंच किया। Meesho की मदद से कोई भी ऑनलाइन शॉपिंग करने के साथ साथ उनके प्रोडक्ट्स को बिकवा भी सकता है। Meesho में आप अपने हिसाब से कमीशन सेट कर सकते है, जो इसको बाकी इ कॉमर्स वेबसाइट से सबसे आगे लाकर खड़ा कर देता है।

देश की बहुत महिलाओं ने Meesho की मदद से घर बैठे रिसेल्लिंग शुरू की और काफी काम समय में ही हर महीने लाखों रुपये कमाने लगी। छोटे बिज़नेस ओनर्स ने भी इस प्लेटफार्म से फायदा उठाया और लगातार यह कारवाँ बढ़ता चला गया।

Meesho क्या है?

Meesho एक ऑनलाइन रिसेलर प्लैटफॉर्म है जो डायरेक्ट मैन्युफैक्चर्स को रिसेलर से जोड़ता है। इस प्लैटफॉर्म के माध्यम से कोई भी मैन्युफैक्चर अपने प्रोडक्ट्स को लिस्ट कर सकता है तथा रिसेलर आसानी से इनमें से कोई भी प्रोडक्ट को सेलेक्ट करके उन्हें बिकवाकर कमीशन प्राप्त कर सकता है।

‘किसी प्रोडक्ट को खरीदकर दूसरे को बेच देना ही ‘रिसेल्लिंग’ कहलाता है।’

Meesho के प्रोडक्ट मार्केट से कम दामों पर मिलते है इसीलिए यहाँ मैन्युफैक्चर्स, रिसेलर और कस्टमर तीनों को ही फायदा मिल जाता है जिसके लिए सभी लोग इस प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल करते है तथा बाकि लोगों को भी इसके बारे में बताते है।

Meesho के फाउंडर कौन है?

Meesho की शुरुआत संजीव बरनवाल व विदित आत्रे ने 2015 में की थी।

संजीव बरनवाल (Sanjeev Barnwal), मीशो के कोफाउंडर व चीफ टेक्नॉलजी ऑफिसर (CTO) हैं। 2012 में इन्होंने IIT दिल्ली से बैचलर ऑफ टेक्नॉलजी की डिग्री इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग ब्रांच से प्राप्त की थी। मीशो के पहले संजीव ने सोनी मोबाइल कम्यूनिकेशन के लिए भी काम कर चुके है।

विदित आत्रे (Vidit Aatrey), मीशो के कोफाउंडर व चीफ इग्क्युजेटिव ऑफिसर (CEO) है। विदित मोबाइल मार्केटिंग प्लैटफार्म InMobi में भी काम कर चुके है।

इस समय मीशो के साथ प्रत्यक्ष रूप से 750 से ज़्यादा की टीम काम कर रही है। अप्रयक्ष रूप से 500 से ज़्यादा शहरों से 20,000 सप्लायर जुड़े हुए है। मीशो के साथ 25 लाख से ज़्यादा रीसेलर काम करके पैसे कमा रहे है।

Meesho की शुरुआत कैसे हुई?

Meesho के कोफाउंडर संजीव तथा विदित ने 2015 में अपने इस स्टार्टअप की शुरुआत की थी। शुरुआत में इन्होंने अपने स्टार्टअप का नाम “FASHNEAR” रखा था। FASH-NEAR में FASH का मतलब Fassion तथा NEAR का मतलब पास में। Fashnear के माध्यम से इन्होंने एक ऐसा ऑनलाइन ऐप तैयार किया था जहाँ पर ग्राहक अपने आसपास की दुकान से कपड़े तथा फैशन सामग्री खरीद सकते थे।

शुरुआत में संजीव और विदित कपड़ों की दुकानों के बाहर खड़े हो जाते थे और ग्राहकों को बाहर ही रोक लेते थे। ये ग्राहक से कहते थे कि अगर आपको शॉपिंग करनी ही है तो आप हमारे इस ऐप के माध्यम से भी कर सकते है और आपको इस ऐप में यह दुकान भी मिल जाएगी। बहुत समझाने के बाद भी लोग इनका ऐप डाउनलोड नहीं करते थे।

संजीव और विदित ने अपने स्टार्टअप की खामियों को समझने का प्रयास किया तो पता चला कि ग्राहक को अपने आसपास की दुकानों से ख़रीददारी करने में कोई समस्या नहीं है लेकिन रिटेलर को इस बात की चिंता जरूर है कि वो अपने सामान को अपने क्षेत्र के बाहर कैसे बेचे।

इन्होंने सप्लायर व रिटेलर की दृष्टि से सपने बिजनेस को डिज़ाइन किया और FASHNEAR का नाम बदलकर “Meesho” रख दिया। Meesho का असली मतलब “Meri Shop” अर्थात मेरी दुकान था। इन्होंने इस नाम को इसलिए चुना ताकि हर रिटेलर को मीशो अपनी दुकान ही लगे।

संजीव व विदित ने दुकानों का सर्वे किया तो पता चला कि ज़्यादातर दुकानदार अपने सामान को व्हाट्सप्प ग्रुप के माध्यम से बेचने का प्रयास कर रहे है। मीशो में लिस्टेड ज़्यादातर दुकानें महिलाओं के द्वारा ही चलाई जाती थी। महिलाओं को मेन्यूफक्चर के पास जाकर सामान लेने व उन्हें बेचने में काफ़ी समस्ययों का सामना करना पड़ रहा था।

इस समस्या को दूर करने के लिए इन्होंने मीशो के माध्यम से मैन्युफैक्चरर्स और रिटेलर्स को एक ही प्लैट्फ़ॉर्म पर जोड़ दिया। अब महिलायें मैन्युफैक्चरर्स से सामान ख़रीदकर डायरेक्ट कस्टमर को बेच सकती थी। ना सामान ख़रीदने का झंझट, ना रखने का झंझट। इस प्लैट्फ़ॉर्म के माध्यम से कोई भी बिना किसी इन्वेस्टमेंट के अपना बिजनेस शुरू कर सकता था और ठीक ठाक पैसे भी कमा सकता था।

मीशो के इसी बिजनेस मॉडल ने इनको बाकी प्लैट्फ़ॉर्म से बिल्कुल अलग पहचान दिलाई और साल दर साल भारत में अपनी छाप छोड़ते चले गए।

Meesho ने कब और कितनी फंडिंग प्राप्त की?

2016 में Meesho ने अपनी सबसे पहली फ़ंडिंग 2 करोड़ रुपयों की प्राप्त की थी। अभी तक कुल 11 फ़ंडिंग राउंड में मीशो ने 1.1 बिलियन डॉलर की फ़ंडिंग उठाई है।

मीशो 2023 की शुरुआत में ही कम्पनी का IPO करने की योजना बना रहे है। ये इंडिया के साथ साथ अमेरिका के मार्केट में भी पब्लिक लिस्टिंग कर सकते है।

Meesho का भविष्य क्या है?

इस समय Meesho ऐप पर 10 करोड़ से भी ज़्यादा डाउनलोड है। इस ऐप को मैन्युफैक्चर्स, सप्लायर, रिटेलर के साथ साथ ग्राहक भी इस्तेमाल करते है। इनका प्लैट्फ़ॉर्म बाकी इ कॉमर्स प्लैट्फ़ॉर्म से काफ़ी अलग है इसीलिए यह मार्केट का नम्बर 1 रीसेलिंग ऐप है।

मीशो अपने प्लैट्फ़ॉर्म के माध्यम से कम से कम 10 करोड़ छोटे बिजनेसेस को समरिद्ध बनाना चाहते है। मीशो का कहना है कि इंटरनेट कॉमर्स सभी के लिए है और इससे कोई भी वंचित ना रह जाए हम इसके लिए प्रयास करते रहेंगे।

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